कस्सप बुद्ध
Jataka Stories - Matanga - Kassapa Buddha
Kassapa Buddha on the panel Cave 17, Ajanta
कस्सप बुद्ध पालि परम्परा में परिगणित चौबीसवें बुद्ध थे। इनका जन्म सारनाथ के इसिपतन भगदाय में हुआ था, जहाँ गौतम बुद्ध ने वर्षों बाद अपना पहला उपदेश दिया था।
काश्यप गोत्र में उतपन्न कस्सप को पिता का नाम ब्रह्मदत्त था और माता का नाम धनवती। उनके जन्मकाल में वाराणसी में राजा किकी राज्य करते थे। इनकी धर्मपत्नी का नाम सुनन्दा था, तथा पुत्र का नाम विजितसेन।
दो हज़ार वर्षों तक गृहस्थ जीवन भोगने के बाद उन्होंने संयास का मार्ग अपनाया। सम्बोधि के पूर्व उनकी धर्मपत्नी ने उन्हें खीर खिलाई थी और सोम नामक एक व्यक्ति ने आसने के लिए घास दिये थे। उनका बोधि-वृक्ष एक वट का पेड़ था।
कस्सप बुद्ध ने अपना पहला उपदेश इसिपतन में दिया था। तिस्स और भारद्वाज उनके प्रमुख शिष्य थे तथा अतुला और उरुवेला उनकी प्रमुख शिष्याएँ। उनके काल में बोधिसत्त का जन्म एक ब्राह्मण के रुप में हुआ था, जिनका नाम ज्योतिपाल था।
बीस हज़ार वर्ष की अवस्था में कस्सप का परिनिर्वाण काशी के सेतव्य उद्यान में हुआ था।
फाह्यायान और ह्मवेनसाँग ने भी कस्सप बुद्ध के तीर्थस्थलों की चर्चा की है।
संस्कृत परम्परा में कस्सप बुद्ध कश्यप बुद्ध के नाम से जाने जाते हैं।
K assapa Buddha is the twenty-fourth Buddha of the Pali tradition; and one of the seven Buddhas mentioned in Pali canons. Besides, he is also reckoned as the third Buddha of the present aeon (Bhadda Kappa).
Kassapa was born in the Deer Park of the Isipatana when king Kiki was ruling Varanasi. He was the son of Brahmadatta and Dhanavati and belonged to the Kassapa gotta (clan). His chief wife was Sunanda; and son Vijitasena. He led the house-hold life for two thousand years and lived in the palaces called Hamsa, Yasa and Sirinanda. Then he renounced the worldly life.
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